चलो दशहरा मनाते हैं


7 महीना ago

दशहरे को वर्षा ऋतू के अंत में मनाया जाता है। श्री राम की जीत के अतिरिक्त इस दिन का एक और भी महत्व है। प्राचीनकाल में लोग अपनी प्रत्येक यात्रा को इसी दिन शुरू करना शुभ मानते थे। वर्षा ऋतू के आने की वजह से क्षत्रिय राजा और व्यापारी अपनी यात्रा को स्थगित कर देते थे।

बुराई पर अच्छाई की विजय : हमारा भारत एक धर्म प्रधान देश है। भारत के सभी पर्वों का संबंध धर्म , दर्शन और अध्यात्म से होता है। माँ दुर्गा और भगवान श्री राम ये दैवीय शक्ति अथार्त सत्य के प्रतीक हैं इसके विपरीत महिषासुर , रावण , मेघनाथ और कुम्भकर्ण ये सभी आसुरी शक्ति के अथार्त असत्य के प्रतीक थे इसलिए विजयदशमी दैवीय शक्ति आसुरोई शक्ति पर या असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

हमारे अंदर दैवीय और असुरी दोनों प्रकार की शक्तियाँ विद्यमान होती हैं जो हमेशा हमें शुभ और अशुभ कामों के लिए प्रेरित करती हैं। जो व्यक्ति अपनी असुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त कर लेता है केवल वही अपने इवन में श्री राम और माँ दुर्गा की तरह महान बन पाता है।

इसके विरुद्ध जो व्यक्ति असुरी शक्तियों के अधीन होता है वः रावण और महिषासुर जैसा बन जाता है। दशहरे को मनाने से हमें उस दिन की याद आती है जब श्री राम ने अपनी संस्कृति का विदेशों में भी प्रसार किया था और आर्य समाज की नीव को लंका में रखा था। श्री राम जी की तरह के पितृ भक्त और लक्ष्मण जैसे भ्रातृभक्त और सीता माता की तरह की पतिवृता और धैर्य से काम लेने वाली तथा हनुमान की तरह का स्वामी भक्त बनने की हमेशा प्रेरणा मिलती है।

हमें केवल अपने त्यौहारों को परम्परागत ढंग से मनाना ही नहीं चाहिए बल्कि उनके आदर्शों पर चलकर अपने जीवन को चरितार्थ करना चाहिए। हमें माँ दुर्गा की तरह बनने का प्रयास करना चाहिए जिस प्रकार उन्होंने कल्याणार्थ के लिए बड़े-बड़े काम किये थे उसी तरह हमें भी लोगों की सेवा हेतु हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

दशहरे के दिन कुछ असभ्य लोग शराब पीते हैं और आपस में लड़ाई झगड़ा करते हैं। यह बात अच्छी नहीं है। अगर व्यक्तियों द्वारा इस तुहार को ठीक तरीके से मनाया जाता है तो इससे कई प्रकार के आशातीत लाभ मिलते हैं। राम के जीवन पर प्रकाश डालें और उस समय के इतिहास को ध्यान में रखें।

इस तरह से दशहरा हमें उन गुणों को धारण करने का उपदेश देता है जो गुण राम में विद्यमान थे। दशहरा मेला उत्सव का मुख्य आकर्षण है। शहरों में सभी लोगों के लिए मेले का आयोजन किया जाता है और बच्चों के खेलने के लिए गेमों का आयोजन भी किया जाता है। कोटा मेला और मैसूर मेला दशहरे के प्रसिद्ध मेले हैं।

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