प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ


11 महीना ago
प्रकृति ने हम सभी मनुष्यों के लिए अनमोल रत्न दिये है। जैसे धूप, हवा, मिट्टी, पानी जिसके अभाव में जीवन की कल्पना करना मिथ्या है।
धूप सूर्य कि किरणों के द्वारा जो उर्जा हमें प्राप्त होती है वो उर्जा हमें कही भी प्राप्त नहीं हो सकती है। बस जरूरत है हमें अपने आप को प्रकृति के नियमों अनुसार ढालने की।
हवा
आज प्रदूषण इतना बढ चुका है कि शहर के बीच में शुद्ध वायु की कल्पना भी नहीं कि जा सकती है इन सभी का जिम्मेदार भी स्वयं मनुष्य ही है।
आज चारों तरफ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है कही फोरलेन रोड कहीं सिक्सलेन रोड का निर्माण कहीं कुछ कहीं कुछ ये विकास हो रहा है कि विनाशकारी प्रदर्शन की तैयारी।
क्या वृक्षों पर आरी चलाकर विकास संभव है
हम सभी को जागना होगा नहीं तो वो दिन दूर नहीं आनी वाली पीढ़ियों का जीवन संकटमय होगा क्योंकि अभी नहीं सम्भलें तो फिर कौन सा समय आयेगा जागरण का। सरकार को भी चाहिए कि हर एक घरों के सामने एक वृक्ष को लगाना अनिवार्य करें। ये हमसभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि विनाशकारी प्रदर्शन को रोकने पर्यावरण को और शुद्ध आक्सीजन के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ों को लगाये और लोगों को भी प्रेरित करें। तब ही हम शुद्ध वायु प्राप्त कर पायेगें। प्राकृति एंव प्राकृतिक संसाधनों को हमें बचाना होगा जो हम सभी मनुष्यों का दायित्व है।
प्राकृतिक चिकित्सा में मृदा (मिट्टी) का प्रयोग
शरीर में विष को नष्ट करने हेतु मिट्टी की पट्टी का प्रयोग बहुत ही सुंदर होता है। उदर व्याधियों में अचूक है मिट्टी की पट्टी का प्रयोग एक प्रयोग बहुत ही अच्छा है अगर पेट में कोई गांठ या फोड़ा हो जाये तो साफ चिकनी मिट्टी को लेकर बढिया से छानकर उसमें मूली के पत्तों का रस मिलाकर पानी के सहयोग से सानकर दस mm की पट्टी सांचे के द्वारा तैयार करके व्याधि युक्त उदर स्थल पर तीस मिनट तक रखवाना चाहिए  ये प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से मैं समय-समय पर करवाता हूँ एक महीने में ही अचूक परिणाम आते हैं।
पानी
पानी के सम्बन्ध में भी लोगों को कोई जानकारी नहीं है आज के प्रदूषण युक्त माहौल में पानी की शुद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरो का पानी यानी डेड वाटर ये पानी हमारी हड्डियों का जानी दुश्मन हैं। पानी को शुद्ध करने हेतु प्राकृतिक प्रयोग करें और स्वस्थ और निरोगी जिवन जियें
सहजन की फली के बीजों को एक लीटर पानी में रात्रि को एक बीज डालकर रख दें सुबह छानकर ले शुद्ध मिनरल वाटर तैयार है आपके लिए । पानी को अल्कालाइन (क्षारीय) बनाया जा सकता है इसके लिए पुदिने का का प्रयोग करें हरे पुदिने की कुछ पत्तियों को हाथ से मसलकर पानी में तीन से चार घंटे के लिए डाल दें फिर छानकर प्रयोग करें बिल्कुल नेचुरल निर्मल क्षार युक्त जल जब हरा पुदीना नहीं मिले तब सुखे हुए पुदिने का प्रयोग करना चाहिए कपड़े में बांधकर पानी में डालकर रख दें रात्रि को सुबह छानकर प्रयोग में लें।
महिलाएं और स्वास्थ
आज हमारे घरों की महिलाओं को जागरूक होना बेहद जरूरी है। क्योंकि महिलाएं एक स्तम्भ की तरह है जिससे जुड़े हुए हैं परिवार के सभी सदस्य और महिला से जुड़ा है रसोई क्या बनाना खिलाना ये जानकारी बेहद  मायने रखती है। घरों की सभी माताओं एंव बहनों से मेरा विशेष अनुरोध है कि आप अपने घरों में आयोडीन युक्त नमक और रिफाइन्ड आयॅल का प्रयोग बिल्कुल बंद करके शुद्ध प्राकृतिक सेंधा नमक या काला नमक और शुद्ध सरसों का तेल ही प्रयोग करें और अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें। प्राकृतिक चिकित्सा जीवन संजीवनी है कृपया हमेशा प्राकृतिक संसाधनों को ही जीवन स्थान देना चाहिए तभी हम एक निरोगी जीवन जी सकते है
*प्रस्तुति*
डां आर. के. श्रीवास्तव (योगी डॉ रोहित राज)

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