संबंधों की कुंजी


11 महीना ago
लड़ लो -झगड़ लो  मगर बोलचाल बंद मत करो ।
सदा याद रखना, भले ही लड़ लेना-झगड़ लेना, पिट जाना-पीट देना, मगर बोलचाल बंद मत करना, क्योंकि बोलचाल के बंद होते ही सुलह के सारे दरवाजे बंद हो जाते है। गुस्सा बुरा नहीं है। यह मानव स्वभाव है लेकिन गुस्से के बाद आदमी जो बैर पाल लेता है, वह बुरा है। गुस्सा तो बच्चे भी करते है, मगर बैर नहीं पालते। वे इधर झगड़ते है और उधर अगले ही क्षण फिर एक हो जाते हैं। कितना अच्छा रहे कि हर कोई बच्चा ही रहे। कुछ व्यक्ति ऐसे होते है जो गलती से प्रेरणा लेकर उससे  लाभ उठाते हुए आगे के लिए सावधान हो जाते है और कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिन्हें कभी अपनी गलती का अहसास ही नहीं होता और वे जिन्दगी भर ठोकरें खाते रहते है।
 सबका  प्रिय  बनना  है  तो..
क्रोध तो दूध का एक उबाल है। जब तक आग रहेगी जब तक दूध उबलेगा लेकिन जब आग ठंडी पड़ जाएगी तो दूध भी बैठ जाएगा। अपेक्षा की उपेक्षा क्रोध है। आप किसी से अपेक्षा रखते हैं और जब उसकी उपेक्षा होती है तो क्रोध आता है। अपेक्षा ही मत रखिए तो फिर आपको कोई भी आपको क्रोध नहीं दिला सकता।
क्रोध जहर है तो क्षमा अमृत है। क्षमा आदत में हो और क्षमा की आदत हो तो जीवन में खुशियां ही खुशियां है । अगर आदमी दिमाग की गर्मी हटाए और जुबान में नरमी लाए तो परिवार में बल्ले-बल्ले हो जाए। मनुष्य समाज में जीता है। सबके साथ सबके बीच में रहता है। अगर उसे सभी का प्रिय बनना है तो वह नम्र बने, बड़ों के सामने झुकना सीखे, अहंकार के हिमालय से उतर कर विनम्रता की कार में सवारी करना सीखे। हर टक्कर अंतत लौटकर उस पर ही हमला करती है। अत: गलती होने पर परस्पर में क्षमा याचना करते चलें।
रिश्ते हमारी सोच से बनते हैं, हमारे व्यवहार से नहीं ।

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