श्रेणी: काव्य

सुख-दुख

ऐ   “सुख”  तू  कहाँ   मिलता    है क्या   तेरा   कोई   पक्का   पता  है क्यों   बन   बैठा   है    अन्जाना आखिर  read more

12 महीना ago

एक बादल

आज सुबह बड़ी दुआओं से एक बादल को बुलाया मैंने, छत पे आहिस्ता से उतारा मैंने कुछ गीला गीला सा read more

12 महीना ago