रिश्ता – द्वारा मुन्सी प्रेमचंद जी

मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की,         आप मुझे पेहचानते हो        …

सुख-दुख

ऐ   “सुख”  तू  कहाँ   मिलता    है क्या   तेरा   कोई   पक्का   पता  है क्यों   बन   बैठा   है    अन्जाना आखिर   क्या   है   तेरा   ठिकाना ।…